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Wednesday, September 13, 2017

2018: भारतीय रेलवे की रोचक बातें जिन्हें जानकर रह जाएंगे हैरान!

2018: भारतीय रेलवे की रोचक बातें जिन्हें जानकर रह जाएंगे हैरान!


इस बार वित्तीय वर्ष 2017-18 का बजट ख़ास होगा। आज़ाद भारत के इतिहास में पहली बार रेल बजट अलग से नहीं बल्कि आम बजट के साथ ही पेश किया जा रहा है। लेकिन क्या है इस विशाल सरकारी विभाग का इतिहास और क्या हैं इसकी रोचक बातें आइए जानते हैं।










साल 1853 में ब्रिटिश राज में पहली बार देश में रेल पटरी पर दौड़ी थी। यह मुंबई-थाणे के बीच चलाई गई थी। रेलवे ब्रिटिश राज में सबसे बड़ा विभाग था। इसके सही से संचालन में दिक्कतें आ रही थी। मुद्दे को सुलझाने के लिए ब्रिटिशर्स ने एक कमेटी गठित की।







विलियम एक्वर्थ की अध्यक्षता में साल 1920 में एक 10 सदस्यीय कमेटी गठित की गई। विलियम एक्वर्थ कमेटी के सुझावों पर अमल करते हुए ब्रिटिशर्स साल 1924 के आम बजट से अलग कर रेल बजट पेश करना शुरु किया।










पहली बार रेल बजट 1994 में दूरदर्शन पर टेलीकास्ट किया गया। भारतीय रेल दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी रेल है। पहले नंबर पर अमेरिका है और दूसरे नंबर पर चीन है।







रोजगार प्रदान करने में भारतीय रेल दुनिया का सांतवा स्थान है। भारतीय रेल रोज़ाना करीब 13 हज़ार और करीब 7.5 हज़ार मालगाड़ी ट्रेन चलाती है।









भारतीय रेल में रोज़ाना करीब 2.5 करोड़ यात्री सफर करते हैं। जोकि ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड जैसे कई देशों की कुल जनसंख्या से भी ज़्यादा है। जम्मू और कश्मीर में चेनाब नदी के ऊपर बनने वाला ब्रिज दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज होगा। इसका निर्माण कार्य चल रहा है और इसकी ऊंचाई 1,178 फीट होगी। यह कुतुब मीनार से 5 गुना ज़्यादा ऊंचा होगा।








देश की सबसे लंबी ट्रेन विवेक एक्सप्रेस दिब्रुगढ़ से कन्याकुमारी के बीच 4273 किमी की दूरी के लिए दौड़ती है। देश का सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशन लखनऊ है। यहां से रोज़ाना 64 ट्रेन गुज़रती है। एशिया का सबसे बड़ा रेल म्युज़ियम दिल्ली में है।










नवापुर रेल स्टेशन देश के दो राज्यों के बीच में स्थित है गुजरात और महाराष्ट्र।
देश की सबसे धीरे चलने वाली ट्रेन नीलगिरी पैसेंजर ट्रेन है जो पहाड़ पर मात्र 10 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है।.









किसी भी घटना के वक्त ट्रेन का कंट्रोल न छोड़ने वाले रेलवे के लोको पायलट्स की सैलरी 1 लाख रुपये से भी ज़्यादा है। खिल चंद्रा के एक ख़त के बाद ही भारतीय रेलवे में टायलेट सीट लगी थी। वह वकील थे और एक बार ट्रेन से उतर कर स्टेशन पर टॉयलेट करने के कारण उनकी ट्रेन छूट गई थी और उन्होंने इसके लिए रेलवे को बकायदा ख़त लिखा था।









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