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Friday, September 29, 2017

4 तथ्य जो बताते हैं मंदिर का इतिहास

4 तथ्य जो बताते हैं मंदिर का इतिहास



शिवरात्रि मंदिरमें भव्य रूप से मनाई जाती है। पिछले कुछ वर्षों से शिव बारात पहाड़ी मंदिर से निकलकर यहां आती है। दुर्गा पूजा के समय मंदिर परिसर में दुर्गाजी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। पिछले एक दशक से यहां गणेश पूजा का भी आयोजन होता है।












प्रत्येक शनिवार को माताजी निर्मला देवी का सहजयोग कार्यक्रम होता है।









मंदिर की देख-रेख अब एक ट्रस्ट करती है। जिसका पदेन सचिव रांची एसडीओ अनुमंडलाधिकारी होते हैं। मंदिर के रख-रखाव का खर्च इस परिसर में चार दुकानों के किराए एवं दान से पूरा किया जाता है। 










एक एकड़ जमीन पर पुजारी जी का मकान, मंदिर, कई पेड़, एक पुराना कुआं तथा सरना स्थल भी है। {डॉ.मो. जाकिर, साहित्यकार,शिक्षाविद् 









पिस्का मोड़ का प्रसिद्ध विश्वनाथ शिव मंदिर 1850 में बना 










अबयह मंदिर विश्वनाथ शिव मंदिर के नाम से जाना जाता है। लगभग छह दशकों तक मंदिर में पूजा करवाने वाले महंत साधु मोहनानंदजी के निधन के बाद उनकी चबूतरानुमा समाधि मंदिर परिसर में स्थापित की गई है। 








. 1990के दशक में मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया, जिसका शिलान्यास र|ेश्वर दयाल सिंह ने किया था।











पुराना गर्भ गृह जहां शिवलिंग स्थापित था। ठीक उसके ऊपर नया शिवलिंग स्थापित किया गया। पुराना शिवलिंग अब भी गर्भगृह में मौजूद है।साथ ही शिव परिवार की पुरानी तीनों मूर्तियां- पार्वती, गणेश एवं कार्तिक नवनिर्मित मंदिर में उसी स्वरूप में स्थापित हैं। अब मंदिर के अंदर नंदी सहित कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं लगी हुई हैं। 








सन1850 में शिव-भवानी मंदिर का निर्माण जमींदार जगेश्वर दयाल सिंह ने करवाया था। उस जमीन का उल्लेख कैथेड्रल सर्वे 1909 में उनके बड़े-बेटे परमेश्वर दयाल सिंह के नाम से अर्जित है। इस मंदिर का जिक्र 1932 खतियान के आरएस- 2,3 खेवट में भी दर्ज है। खेवट में इस मंदिर परिसर का मालिक जमींदार सरयू दयाल सिंह दर्ज हैं। उस समय मंदिर में नंदी की मूर्ति नहीं लगी थी। मंदिर परिसर का पूरा क्षेत्रफल 1 एकड़ है, जिसमें से 62 डिसमिल जमीन जमींदार सरयू दयाल सिंह ने भगवान शिव को समर्पित किया था। आस-पास के लोग यहां पूजन के लिए आते हैं। पूर्व में मंदिर का सारा खर्च जमींदार परिवार ही वहन करता था। 








यदि आपके पास भी कोई यूनिक कलेक्शन या स्पेशल पेट हों तो हमसे जरूर संपर्क करें। ‘रांची पोस्ट’ पेज कैसा लगा, आप हमें फोन नंबर 9934523670 पर सुबह 11 से शाम 6 बजे तक वाट्सएप द्वारा फीडबैक दे सकते हैं। हमें kundan.kumar@dbcorp.in पर मेल भी कर सकते हैं।167 साल पहले पिस्का मोड़ में शिव-भवानी मंदिर बना, जो आज विश्वनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है। पुराना मंदिर सुर्खी-चूना और ईंट का बना था, जिसमें शिव जी के साथ उनके परिवार के पार्वती, गणेश एवं कार्तिक की मूर्तियां स्थापित थीं। अब नया शिवलिंग स्थापित है, लेकिन पुराना अब भी गर्भगृह में मौजूद है। 



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