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Wednesday, September 13, 2017

दोस्त तो होंगे हजार, पर दोस्ती के होते हैं ये 6 प्रकार

दोस्त तो होंगे हजार, पर दोस्ती के होते हैं ये 6 प्रकार  


यूं तो रोजमर्रा की जिंदगी में हमारे कई दोस्त होते हैं, जिनमें कुछ खास, तो कुछ आम होते हैं। दोस्ती भी सबसे अलग-अलग होती है। कभी सिर्फ हाय-हैलो, कभी काम चलाउ, कभी खट्टी-मीठी नमकीन, तो कभी सतरंगी रंगों









व्यावसायिक दोस्ती -

 आपसी सामंजस्य और अटूट भरोसे के बल पर रची हुई दोस्ती का एक ये भी रूप है। मिलजुलकर एक ही व्यवसाय करने वाले दो दोस्त किसी आत्मीय सगे-संबंधी से कम नहीं रह जाते, बल्कि कई मामलों में तो





लंच टाइम की दोस्ती -

 ढेर सारी फाइलों और टारगेट का दबाव हो या फिर अभी-अभी पड़ी बॉस की झाड़... घर में सास-बहू की शिकवे-शिकायत हों या फिर अपने किसी बीमार के लिए दिल में पल रही चिंता...। कार्यालय की दोस्ती









यहां लंच टाइम में आपस के सुख-दुख भी बंट जाते हैं और कई बार तो ऐसे ही कोई मिसेस वर्मा अपनी सहयोगी की बिटिया के लिए वर ढूंढ देती हैं या फिर पिछले महीने से फोन के कनेक्शन के लिए भटक रहे जोगिन्दर साहब के







क्या तुमको भी पसंद है यह' वाली दोस्ती? 


जी हां, मामला जब एक सी पसंद का हो तो तुरंत हो जाती है दोस्ती। चाहे फिर बात रितिक रोशन के फैन होने की हो, डिजाइनर सलवार सूट पसंद करने, एक ही राइटर की किताबें और












सोशल साइट्स की दोस्ती -


 तकनीक के परों पर सवार इस दोस्ती ने मीलों की दूरियों को पटाया है। सन्‌ 2014 में सन्‌ 1980 के बिछड़े दोस्तों को भी मिलाया है। एसएमएस और मिस कॉल की इस दोस्ती को आगे बढ़ाया इंटरने









स्कूल-कॉलेज की दोस्ती -


 कॉपियों-किताबों में रखी रंगीन फुद्दियों (पंखों), विद्या की पत्तियों और पेंसिल की छीलन से लेकर स्टीकरों, 'कॉन्ट्री' की चाय और समोसों, आधी रात को की गई नोट्स की जुगाड़, असाइनमेंट










अड़ोस-पड़ोस की दोस्ती -


 भर गर्मी में घर की छत पर साड़ी या दुपट्टे की छांह में रोटा-पानी करती नजर आती है तो कभी संकरी-सी मोहल्ले की गली में साइकल को स्टम्प बना दिल को क्लीनबोल्ड कर जाती है ये दोस्ती। बड़े








कंचों के अंदर गुंथी हुई रंग-



बिरंगी दुनिया से लेकर फेसबुक तक और टिफिन से लेकर एक्जाम के 'आईएमपी' क्वेशचन्स के बंटवारे तक... दोस्ती न किसी नियम में बंधती है, न ही कायदे में। वो दोस्ती ही क्या, जहां









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