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Tuesday, September 19, 2017

यहां पानी से जलता है मंदिर का दिया, गर्दन काटकर दर्शन देती है मां

यहां पानी से जलता है मंदिर का दिया, गर्दन काटकर दर्शन देती है मां



महिदपुर की पहाड़ी पर बिजासन टेकरी है। यहां चामुण्डा बिजासन माता का मंदिर है। वैसे तो नवरात्रि के नौ दिन यहां भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन नवमी पर हजारों की भीड़ उमड़ती है। आसपास के लोग इसे चमत्कारी मंदिर मानते हैं। यहां एक ऐसा चमत्कार होता है, जिसे देखकर हर कोई दांतो तले अंगुली दबा लेता है। मंदिर में माताजी की मूर्ति के सामने करीब 25 साल से अखंड ज्योत जल रही है।












ख़ास बात ये है कि ये ज्योत तेल या घी से नहीं, बल्कि पानी से जलती है। इस दीपक में कुंवारी कन्या अपने हाथ से पानी डालती है और ज्योत जलती रहती है।









पंडित दीपक शर्मा बताते हैं कि कई नास्तिक लोग अखंड ज्योति की जांच के लिए आ चुके हैं। कुछ तो अपने साथ पानी लेकर आए थे, लेकिन जैसे ही मासूम बच्ची ने उनसे पानी लेकर दीपक में डाला तो वह तेल की तरह जलने लगा।









किसी को कुछ सझ नहीं आया और चमत्कार की जांच करने आए लोग भी इस चमत्कार के आगे शीश झुकाकर चल दिए।









नवमी के कारण सोमवार को यहां त्यौहार जैसा माहौल था। मंदिर परिसर में हजारों की संख्या में लोग इकट्ठे थे। इसी दौरान मंदिर के आराधक संतोष माताजी मंदिर में पहुंचे।










पंडित दीपक शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता अनिल बैरागी ने बताया कि नवमी के दिन मंदिर के आराधक संतोष माताजी के शरीर में खुद बिजासन माता प्रकट होकर दर्शन देती है।









- काली माता की वेशभूषा में जब संतोष माता हाथ मे पूजा का खप्पर और तलवार धारण कर अपनी कुटिया से निकली तो श्रद्धालुओं के रोंगटे खड़े गए। 











कुटिया से मंदिर तक के रास्ते में फूल बिखेरकर श्रध्दालु दोनों तरफ खड़े होकर जयकारे लगा रहे थे। मां पहले शिप्रा नदी में पहुंची वहां उन्होंने खप्पर प्रवाहित कर तलवार नदी में बहा दी।








फिर श्रद्धालुओं ने उन्हें चुनरी ओढाई इसके बाद नदी में हाथ डाला तो प्रवाहित तलवार फिर से उनके हाथ में आ गई।









इसके बाद माता की सवारी मंदिर में पहुंची। यहां फिर माता ने अपनी तलवार से गर्दन पर प्रहार किया। देखते-ही देखते वो लहूलुहान हो गई। इसके बाद सबको दर्शन देकर संतोष माताजी मंदिर के गर्भगृह में चली गई। पंडित दीपक शर्मा ने बताया कि यहां कई कुछ ख़ास सिद्धियों के तांत्रिक लोग सात्विक साधना भी करते हैं।



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