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Sunday, October 1, 2017

भारत की शान

 भारत की शान 



 मुंह फेर ले


क़यामत हैं हम, बगावत हैं हम, सलामत हैं हम











मुंह फेर ले


दिलवाले हैं हम, रखवाले हैं हम, शान से जीने वाले हैं हम







मुंह फेर ले


इतना मत उड़ आसमान में, लगाम दे अपनी जुबान में,
तूने सिर काटा है हिंदुस्तानी सैनिक का,
तुझे दफना देंगे हम श्मशान में।









मुंह फेर ले

खैर समझ की तू हमारा अंश है,
और इकलौता वंश है, हाथ अपने पीछे करले अन्यथा,
अब विध्वंश ही विध्वंश है।










मुंह फेर ले


भारत पुण्य से शुद्ध है, तू पाप से अशुद्ध है,








माफ़ी मांग ले हमसे वरना, आखरी मर्ज़ तेरा,







सिर्फ और सिर्फ युद्ध है










मुंह फेर ले

युद्ध में मरा जायेगा, कही का न रह पायेगा






माफ़ी मांग ले बचा रहेगा, अन्यथा इतिहास के पन्नों में,खो जायेगा, हमेशा के लिए सो जायेगा








विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।



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