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Thursday, November 9, 2017

जब -22 डिग्री टेम्परेचर में जमी पड़ी थी लड़की, फिर भी बच गई जान

जब -22 डिग्री टेम्परेचर में जमी पड़ी थी लड़की, फिर भी बच गई जान


यह 20 दिसंबर, 1980 की बात है। अमेरिका के मिनेसोटा राज्य की लेंग्बी नामक जगह पर एक 19 साल की लड़की कार में अकेली जा रही थी। अचानक उसकी कार सड़क के नीचे की ओर उतरी और खराब होकर बंद हो गई। रात का समय था। तापमान माइनस 22 डिग्री फैरेनहाइट था।












यानी जीरो से 30 डिग्री सेल्सियस नीचे। ऐसी कड़ाके की ठंड में आसरा ढूंढने के लिए वह आगे बढ़ी। इसके बाद जो हुआ, वह रोमांचक, खतरनाक और चमत्कार से भरा था।







19 साल की उस लड़की का नाम था जीन हिलिआर्ड। कार खराब होने के बाद जब वह अपना कोट और जैकेट लेकर आगे बढ़ी, तो उसे दूर एक फार्महाउस दिखाई दिया।










जब वह वहां पहुंची, तो पता चला कि फार्महाउस बंद था। आगे एक और फार्महाउस था, पर वह भी बंद मिला।






कुछ दूर पर उसे एक घर की रोशनी दिखाई दी। वह मजबूरन उस दिशा में बढ़ चली। उस कड़ाके की ठंड में वह बाहर नहीं रह सकती थी। उसकी हालत काफी खराब हो चुकी थी।








लेकिन जीन उस घर तक नहीं पहुंच पाई। वह उससे करीब 15 फीट पहले ही गिर गई और फिर नहीं उठ पाई।सुबह करीब 7 बजे घर के मालिक वेली नेल्सन ने उसे देखा। उसके शरीर में जिंदा होने के कोई लक्षण नहीं थे। उसका पूरा शरीर जमा हुआ था।







तभी नेल्सन ने उसके मुंह से एक हल्की कराह सुनी। वे उसे तुरंत अपनी कार की पिछली सीट पर डालकर फॉस्टन हॉस्पिटल ले गए। डॉक्टरों ने देखा कि जीन की हालत बहुत खराब थी। उसके बचने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही थी। उसका शरीर अकड़कर एकदम कड़ा हो चुका था। यहां तक कि उसमें निडिल तक नहीं घुस पा रही थी। जीन की पुतलियां सिकुड़ चुकी थीं और उसकी आईबॉल्स जमी हुई थीं। उसकी आंखों में रोशनी डालने पर भी कोई हलचल नहीं हो रही थी। उसकी पल्स बहुत धीमी थी, मात्र 12 बार प्रति मिनट। उसके शरीर का टेंपरेचर इतना कम था कि थर्मामीटर में रीडिंग ही नहीं आ रही थी। तभी एक डॉक्टर ने हल्की-सी कराह सुनी











ऐसे किया गया इलाज


डॉक्टर्स ने तुरंत उसके शरीर को इलेक्ट्रिक कंबल में लपेटा। यह विशेष कंबल होता है, जिसके भीतर गर्म पानी बहता रहता है। इसके साथ ही उसे ऑक्सीजन दिया गया। इसके बावजूद डॉक्टर्स को उम्मीद नहीं थी कि वह बच जाएगी। उन्हें लग रहा था कि वह किसी तरह बची भी, तो उसका दिमाग डैमेज हो चुका होगा, क्योंकि वह करीब 7 घंटे तक बर्फ में जमी पड़ी थी। 






धीरे-धीरे जीन के शरीर में गर्माहट बढ़ने लगी। फिर जब उसका बॉडी टेम्परेचर 98 डिग्री फैरेनहाइट हो गया, तो इलेक्ट्रिक कंबल निकाल दिया गया।








उसका बचना एक चमत्कार ही था


डॉक्टरों की आशंका के विपरीत जीन न केवल बच गई, बल्कि उसके दिमाग सहित सारे अंग सही-सलामत रहे। 49 दिन बाद जब उसे हॉस्पिटल से छुट्टी मिली, तो उसके शरीर पर कोई परमानेंट डैमेज नहीं था। जीन का इस तरह बच जाना एक चमत्कार ही था। डॉक्टरों का अनुमान है कि 19 साल की जीन की यंग एज ने उसे रिकवर होने में मदद की। इसके अलावा, उसका बाहरी शरीर जमा था, लेकिन भीतरी अंग नहीं जमे थे, इसलिए उनमें कोई डैमेज नहीं हुआ और गर्माहट मिलने के बाद वे काम करने लगे।





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