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Tuesday, May 22, 2018

BREAKING NEWS :- STD 10TH SSC RESULT OFFICIAL DATE DECLARED SEE GSEB GUJARAT OFFICIAL LETTER

BREAKING NEWS :- STD 10TH SSC RESULT OFFICIAL DATE DECLARED SEE GSEB GUJARAT OFFICIAL LETTER



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GSEB SSC Result 2018 is announcing soon in the 3rd week of May 2018. Gujarat Secondary and Higher Education Board (GSEB) is the main authority to regulate and control the 10th & 12th examination in the state of Gujarat. The board was founded on 1st May 1960. The headquarter of Gujarat Board is located in Gandhi Nagar, Gujarat. The GSEB board is responsible to organize and declare the result for matric & intermediate exams. Students can get here the complete information about Gujarat Board 10th result 2018.







Every year, Lacs of student appear in the Gujarat SSC examination. The board will release the GSEB SSC result 2018 through online mode. Students those will appear in the 10th board examination can check the result after two months of the examination.


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GSEB 10th result 2018 can be checked by entering the exam roll number which will be of seven digits. The students are advised to take the printout of the result and keep it secure.

Gujarat Board 10th Result Date 2018









The board organized the 10th exam in the month of March 2018. The link for checking the Gujarat SSC result 2018 will be given in our article after it will be announced by the board.

Previous year the exam was conducted from 15th March to 25th March and the result was published on 29th May. For the year 2018, the GSEB SSC result is declaring in the third week of May 2018



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Tuesday, May 8, 2018

क्‍यों मिल कर भी नहीं मिलता इन महासागरों का पानी, संगम पर दिखते हैं दो रंग

क्‍यों मिल कर भी नहीं मिलता इन महासागरों का पानी, संगम पर दिखते हैं दो रंग



अंतरराष्‍ट्रीय सीमा पर हिंद महासागर और प्रशांत महासागर मिलते हैं तो दोनों घुलमिल कर अपना वजूद नहीं खोते बल्‍कि दो अलग रंगों में साफ अलग नजर आते हैं।






दो महासागरों में दो रंग का पानी 


हमारी धरती के 70% हिस्से पर पानी ही पानी मौजूद है और इसका अधिकांश हिस्‍सा 5 महासागरों की अपनी अनंत सीमाओं के साथ पूरी पृथ्‍वी पर मौजूद है।








इन महासागर की सीमाओं और छोर को देख पाना वैज्ञानिकों के लिए भी आसान नहीं है, लेकिन दो महासागरों की सीमायें ऐसी है जो आपस में मिलते हुए बिल्कुल साफ नजर आती हैं।







इसकी वजह यह है कि उनका पानी आपस में मिलता नहीं बल्कि अलग अलग नजर आता है। यह नजारा देखकर दुनिया दंग है 





और कुछ लोग तो इसे चमत्कार मानते हैं। वैसे इसकी असली वजह कुछ अलग और काफी दिलचस्‍प है।

अनोखा है दो महासागरों का ये संगम

इस दुनिया में मौजूद सात अलग-अलग महाद्वीप और उनके बीच फैले 5 अनंत महासागर हमारी धरती को विविधता और खूबसूरती प्रदान करते हैं। यह बात शायद आप जानते होंगे कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर अलास्का की खाड़ी में एक दूसरे से मिलते हैं, लेकिन क्‍या आपको यह मालूम है कि इन दोनों के मिलन का यह नजारा दुनिया में सबसे अनोखा है, 







क्योंकि इन दो महासागरों का पानी आपस में घुलता मिलता नहीं बल्‍कि बिल्कुल अलग अलग रंगों का नजर आता है। यहां से गुजरने वाले पानी के जहाजों से यह नजारा साफ दिखता है और हैरान कर देता है। हिंद और प्रशांत महासागर की इस सीमा पर पानी के दो अलग-अलग रंग साफ नजर आते हैं। एक ग्‍लेशियर से आने वाला हल्‍का नीला पानी तो दूसरा दूर समंदर से आने वाला गहरा नीला पानी, साथ ही इन दोनो के मिलन स्‍थल पर झाग की एक दीवार साफ नजर आती है। इस जगह की कुछ शानदार तस्वीरें बीते कुछ सालों में इंटरनेट पर खूब वायरल हुई हैं।




क्‍यों दिखता है पानी अलग अलग 


वास्‍तव में इन दोनों महासागरो का पानी एक दूसरे से बिल्कुल अलग दिखने के पीछे एक खास वजह है। इस वजह का रिश्‍ता पानी के घनत्व और उसके तापमान समेत कई बातों से जुड़ा हुआ है। इन दोनों महासागरो के दिखने वाले अलग-अलग पानी को लेकर वैज्ञानिकों द्वारा अब तक तमाम शोध किए गए हैं और अंत में वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला है कि इस जगह पर खारे और मीठे पानी के अलग अलग घनत्व और उनमें मौजूद लवण और तापमान के अलग होने के कारण यह दोनों पानी आपस में पूरी तरह से मिल नहीं पाते। 











प्रशांत महासागर का पानी ग्‍लेशियर से आने के कारण हल्‍का नीला और नमक रहित होता है, जबकि हिंद महासागर का पानी काफी खारा होता है। समंदर की गहराई में भले ही दोनों महासागर का पानी पूरी तरह से तक मिल जाता हो लेकिन ऊपरी सतह पर इन दोनों के भिन्‍न घनत्‍व वाले पानी के टकराने से कुछ झाग पैदा होता रहता है और यह झाग पानी ऊपर सतह पर एक सीमारेखा की तरह नजर आता है। सूरज की रोशनी में खारे और मीठे पानी के अलग-अलग घनत्व के कारण दोनों पानी का रंग एक दूसरे से बिल्कुल अलग नजर आता है।







कई और विचार भी रहते हैं चर्चा में

हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के इस मिलन स्थल पर पानी की दीवार और अलग अलग रंगों के पानी का यह नजारा वाकई दुनिया को चौंकाने वाला है। कई बार तमाम लोग इसे चमत्कार मानते हैं तो कुछ लोग इसे कुछ धार्मिक मान्यताओं से भी जोड़ते हैं। हालांकि वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसा बिल्कुल भी नहीं है और यह दोनों महासागर कहीं ना कहीं जाकर तो आपस में पूरी तरह मिल ही जाते हैं बस समुद्र की ऊपरी सतह पर अलग अलग घनत्‍व वाले पानी के टकराने से पैदा होने वाली दीवार दोनों महासागरों के अलग होने का अनोखा और विस्मयकारी नजारा पेश करती है।




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कलियुग को लेकर श्रीकृष्ण ने की थीं ये चौंकाने वाली भविष्यवाणियां!

कलियुग को लेकर श्रीकृष्ण ने की थीं ये चौंकाने वाली भविष्यवाणियां!



कई युगों से संस्कृत में लिखा गया यह धार्मिक ग्रन्थ मानवता का मार्गदर्शन करता आया है. धर्म क्या है, मोक्ष क्या है? क्या सही है क्या गलत है, इस धर्मग्रन्थ में सारे सवालों के जवाब है. श्रीमद्भागवत गीता को भगवान का गीत भी कहा जाता है. 







कहा जाता है, जब अर्जुन अपने रक्त संबंधियों को मारने को लेकर विचलित थे और उनके सामने एक बड़ा धर्मसंकट खड़ा हो गया था, तब श्रीकृष्ण ने अर्जुन का मार्गदर्शन किया. भाग्वद्गीता में अर्जुन और श्रीकृष्ण के इसी संवाद का वर्णन है.






इस धर्मग्रन्थ के अंतिम अध्याय में कलियुग को लेकर कुछ भविष्यवाणियां भी की गई हैं.





हालांकि ये भविष्यवाणियां श्रीकृष्ण द्वारा 5000 वर्षों पहले की गई थीं लेकिन आज ये सारी भविष्यवाणियां पूरी तरह सच साबित हो रही हैं. इतने वर्षों पहले लिखे ग्रन्थ में वर्तमान के बारे में जो भी बातें कही गई हैं, बिल्कुल सटीक बैठती हैं.





इसमें धरती के अंत को लेकर भी कई चौंकाने वाली भविष्यवाणियां हैं. आखिरी की स्लाइड्स में पढ़ें धरती के अंत के रहस्य...










श्रीमद् भागवतम 12.2.1: कलियुग में धर्म, सच्चाई, स्वच्छता, सहिष्णुता, दया, जीवनकाल, शारीरिक बल और याद्दाश्त सब कुछ घटता चला जाएगा.






श्रीमद् भागवतम 12.2.2कलियुग में मनुष्य का केवल उसकी दौलत के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा. कानून और न्याय केवल किसी की शक्ति को देखते हुए लागू किया जाएगा.









श्रीमद् भागवतम 12.2.3पुरुष और स्त्रियां केवल बाहरी आकर्षण की वजह से साथ रहना शुरू कर देंगे. बिजनेस में सफलता धोखे और बेईमानी पर आधारित हो जाएगी. 






 श्रीमद् भागवतम 12.2.4-केवल बाहरी प्रतीकों से व्यक्तियों की आध्यात्मिकता सुनिश्चित की जाएगी. लोग एक आध्यात्मिक व्यवस्था से दूसरी आध्यात्मिक व्यवस्था को बदलते रहेंगे. एक शख्स की संपत्ति और प्रतिष्ठा पर सवाल उठाए जाएंगे अगर उसकी कमाई अच्छा नहीं होगी. जो शख्स शब्दों का खेल खेलने में कुशल होंगे, ऐसे लोगों का बोलबाला रहेगा. ऐसे ही लोगों को कलियुग में विद्वान समझा जाएगा.
 



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Thursday, April 26, 2018

भारत में मिली दुनिया की सबसे लंबी गुफा की रहस्यमयी दुनिया

भारत में मिली दुनिया की सबसे लंबी गुफा की रहस्यमयी दुनिया




हाल ही में बलुआ पत्थरों की दुनिया की सबसे लंबी गुफ़ा का पता भारत के मेघालय में चला है. मैं इसकी एक झलक पाने के लिए गुफ़ा विज्ञानियों की एक टीम के साथ इस गुफ़ा तक गया.











भयावह दिखने वाली इस गुफ़ा के बेतरतीब प्रवेश द्वार पर अपनी उंगलियां गड़ाते हुए ब्रायन डी खरप्राण चेतावनी देते हैं, "अगर आप अंदर गुम हो गए तो आप इससे बाहर आने का रास्ता कभी ढूंढ़ नहीं पाएंगे." 

 







जंगलों की ढलान पर पेड़, पौधों से करीब एक घंटे तक गुजरते हुए हम क्रेम परी के मुहाने पर पहुंचे. इसे स्थानीय भाषा में यही कहा जाता है.


समुद्र तट से 4,025 फीट की ऊंचाई और सामने गहरी घाटी, यह गुफ़ा खड़े चट्टान के मुहाने पर स्थित है. ज़िब्राल्टर से आकार में दोगुनी बड़ी यह 24.5 किलोमीटर गुफ़ा इस धरती पर सर्वाधिक बारिश के लिए मशहूर मासिनराम की हरी भरी वादियों में 13 वर्ग किलोमीटर में फैली है.


फरवरी तक वेनेजुएला की 18.7 किलोमीटर लंबी इमावारी येउता दुनिया की सबसे बड़ी ऐसी गुफ़ा थी.














71 वर्षीय बैंकर खरप्राण गुफ़ाओं के बारे में बहुत कुछ जानते हैं. वो इन भीषण बारिश वाले पहाड़ी राज्य में करीब ढाई दशक से इनकी खोज में लगे हैं.जब उन्होंने 1992 में इनकी खोज शुरू की थी तो मेघालय में एक दर्जन ज्ञात गुफ़ाएं थीं.


26 साल और 28 खोजी अभियान के बाद, वो और उनकी गुफ़ा विज्ञानियों, भूविज्ञानी, जलविज्ञानी, जीवविज्ञानी और पुरात्तवविदों की 30 सदस्यीय मजबूत अंतरराष्ट्रीय टीम ने राज्य में 1,650 गुफ़ाओं की खोज की है. मेघालय अब दुनिया के सबसे जटिल गुफ़ाओं में से कुछ के लिए जाना जाता है और यहां भारत के अन्य किसी भी जगह की तुलना में सबसे अधिक गुफ़ाएं हैं.
क्रेम पुरी पर वापस आते हैं, हम अंदर जाने के लिए तैयार हैं.







सख्त टोपी और हेडलैंप पहनकर, हम अंधेरे में उतरते हैं. बाईं तरफ नीचे की ओर एक छोटा सा गलियारा है. अगर आप इस बंद, अंधेरे गुफा में क्लॉस्टफोबिया-बढ़ाने वाले छेदों से होकर अपना रास्ता बनाना चाहते हैं तो आपको केविंग सूट पहनने की जरूरत होगी ताकि आप अपने पेट, हाथ और घुटनों पर रेंग सकें. मैंने नहीं पहना है इसलिए मैं ऐसा नहीं कर सकता.










मुख्य गलियारे पर, दो विशाल पत्थर साथ-साथ खड़े थे. आगे बढ़ने के लिए आपको इन पर चढ़ना होगा या इनके बगल से होकर गुजरना होगा.

मैं चतुराई से दोनों की कोशिश कर रहा हूं और मेरे जूते जोख़िम भरे इन चट्टानों के बीच फंस गए हैं. हम पानी से सटे हुए पत्थरों से आगे निकलते हैं जहां आगे हमें मंद धारा मिलती है. मॉनसून के दौरान, संभवतः यह एक तेज़ धारा में बदल जाएगी.

खरप्राण को दीवार पर एक बड़ी मकड़ी दिखी और हमें एक और चीज़ मिली जो भूवैज्ञानिकों के अनुसार चट्टानों में फंसे शार्क के दांत हैं. वो कहते हैं, "गुफ़ा रहस्यों भरी है."

क्रेम पुरी आपस में जुड़े सैकड़ों छोटे लंबे गलियारों का पेचीदा चक्रव्यूह है. इसकी आकृति बिल्कुल अलग है, जो इसे वास्तव में एक भूलभुलैया बनाती है.









यहां कुछ कन्दरा (स्टलैक्टाइट) और स्तंभ (स्टलैग्माइट) भी हैं. यहां प्रचुर मात्रा में जीव, मेंढक, मछली, विशाल हंटर मकड़ियां और चमगादड़ भी हैं.


एक स्विस गुफ़ा विज्ञानी और गुफ़ा का नक्शा बनाने के विशेषज्ञ थामस अर्बेन्ज कहते हैं, "इस गुफ़ा का सर्वे करना बहुत मुश्किल चुनौती है."


आपको इसकी झलक मिलती है जब गुफ़ा की दीवारों, गलियारे, गड्ढों, चट्टानों की श्रेणियों और बड़े चट्टानों को सर्वेयर के दिए नाम आप बहुत बारीकी से देखने पर नक्शे पर पाते हैं.


उदाहरण के लिए, द ग्रेट व्हाइट शार्क एक धूसर चट्टान है जो शार्क के समान है और कैन्यन के बीचों बीच स्थित है.


भंगुर बलुआ पत्थर की इन श्रेणियां चलना दुभर हो जाता है. स्लीपी लंच नामक एक गलियारे में कुछ राहत है जहां थके सर्वेयर ने लंच किया था.














गुफ़ा खोजने वाले इतालवी वैज्ञानिक फ्रांसेस्को साउरो कहते हैं कि उन्होंने कुछ शार्क के दांतों की पहचान की है और उन्हें कुछ हड्डियां मिली हैं जो समुद्री डायनासोर की हो सकती हैं जो छह करोड़ साल पहले समुद्र में पाए जाने वाले आम जानवर थे.

इनमें से कई गुफ़ा के उन इलाकों में हैं जहां पहुंचना बहुत ख़तरनाक और मुश्किल है.

साउरो कहते हैं कि यहां कई और भी चीज़ें पाई गई हैं जिनका वैज्ञानिक विश्लेषण किए जाने के बाद ही खुलासा किया जाएगा.








 वैज्ञानिकों का कहना है कि इसकी दूर दूर तक संभावना नहीं है क्योंकि खानबदोश आदिमानव आमतौर पर बड़े गुफ़ा या चट्टानी जगहों को रहने के लिए चुनते थे. इसके अलावा बारिश के दिनों में यह जगह रहने के लिहाज से उपयुक्त नहीं है, और इसका मतलब यह भी है कि मेघालय की अधिकतर गुफ़ाओं में इंसान नहीं रहते थे.

यह बलुआ पत्थर से बनी गुफ़ाएं हैं जो इन्हें अनोखा बनाती हैं. यहां आमतौर पर चूना पत्थरों के विघटन से गुफ़ाओं का निर्माण होता है.




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Wednesday, February 7, 2018

नए साल पर नोमुरा ने दी खुशखबरी, भारत की जीडीपी ग्रोथ 2018 में रहेगी 7.5 प्रतिशत

 नए साल पर नोमुरा ने दी खुशखबरी, भारत की जीडीपी ग्रोथ 2018 में रहेगी 7.5 प्रतिशत





जापान की वित्‍तीय सेवा कंपनी नोमूरा ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि जनवरी-मार्च तिमाही में भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में तेजी से सुधार आने की उम्‍मीद है और इसकी जीडीपी ग्रोथ 2018 में 7.5 प्रतिशत के आसपास रह सकती है।











जापान की वित्‍तीय सेवा कंपनी नोमूरा ने भारत को नए साल पर खास तोहफा दिया है। नोमुरा ने ताजा रिपोर्ट में कहा है कि जनवरी-मार्च तिमाही में भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में तेजी से सुधार आने की उम्‍मीद है और इसकी जीडीपी ग्रोथ 2018 में 7.5 प्रतिशत के आसपास रह सकती है।







 नोमूरा की कंपोजिट लीडिंग इंडेक्‍स (सीएलआई) के मुताबिक चौथी तिमाही (अक्‍टूबर-दिसंबर) में भी कुछ ग्रोथ दिखाई पड़ सकती है।












इसके बाद 2018 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में तेज सुधार देखने को मिलेगा। इसके पीछे की वजह चल रहा रिमोनेटाइजेशन और वैश्विक मांग में सुधार है।






नोमूरा ने अपनी रिसर्च नोट में कहा है कि वह ग्रोथ आउटलुक को लेकर उत्‍साहित है।










उसका मानना है कि चौथी तिमाही (अक्‍टूबर-दिसंबर) में जीडीपी ग्रोथ सालाना आधार पर बढ़कर 6.7 प्रतिशत रहेगी, जो तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में 6.3 प्रतिशत थी।





 2018 में यह और मजबूत होकर 7.5 प्रतिशत रहेगी। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि मुद्रास्‍फीति के दबाव और तेल की ऊंची कीमतों की वजह से मौद्रिक नीति कठोर बनी रह सकती है। 











नोमूरा ने कहा है कि उसे उम्‍मीद है कि 2018 की दूसरी तिमाही में मौद्रिक नीति के नरम होने की उसे बहुत कम उम्‍मीद है








नोमूरा ने कहा है कि उसे पूरी उम्‍मीद है कि 2018 में भी ब्‍याज दरें अपरिवर्तित ही बनी रहेंगी, क्‍योंकि ग्रोथ और महंगाई दोनों ही बहुत ऊंची रहने की संभावना है।









 रिजर्व बैंक ने अपनी पांचवीं द्वीमासिक समीक्षा में रेपो रेट को 6 प्रतिशत और रिवर्स रेपो रेट को 5.75 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है, जबकि केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्‍फीति के अपने अनुमान को 2017-18 के बचे शेष समय के लिए बढ़ाकर 4.3-4.7 प्रतिशत कर दिया है। 





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