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Sunday, December 24, 2017

इस तरह से प्लान करें अपनी क्रिसमस पार्टी

 इस तरह से प्लान करें अपनी क्रिसमस पार्टी


हर एक इंसान के लिए काफी उत्सुक रहता है, लेकिन ज्यादातर विशेषकर क्रिसमस पार्टीज ऐसी घटना है जो छुट्टियों को मनाने के लिए लोगों को एक साथ लाती है |











अपनी वेकेशन पार्टी की योजना बनाते समय, अपने निमंत्रणों को बहुत सारे नोटिस के साथ भेजना सुनिश्चित करें.






खासकर यदि आप क्रिसमस की पूर्व संध्या या दिसंबर के किसी सप्ताह के अंत में अपने आयोजन की योजना बना रहे हैं. जल्दी योजना बनाएं क्योंकि छुट्टियां ज्यादातर लोगों के लिए एक व्यस्त समय है|











दिनांक को चिह्नित करें.

आपकी पार्टी के लिए सही तिथि चुनना महत्वपूर्ण है. आप किसी की छुट्टी की योजना के साथ संघर्ष नहीं करना चाहते हैं.






अतिथि सूची बनाएं.

उन लोगों की एक सूची बनाएं जिन्हें आप आमंत्रित करना चाहते हैं. मनोदशा के आधार पर, आप करीबी मित्र और परिवार को आमंत्रित कर सकते हैं.










 सुनिश्चित करें कि आपका बजट और स्थल आपके द्वारा तय किए गए लोगों की संख्या को संभाल सके.






एक स्थल खोजें.

अगर आपकी पार्टी घर पर होगी, तो आप सभी तैयार हैं, लेकिन यदि आप किसी रेस्तरां या अन्य जगह पर अपना आयोजन होस्ट करना चाहते हैं तो विलंब से बचने के लिए बहुत समय के साथ अंतरिक्ष को सुरक्षित रखना सुनिश्चित करें. 











अपने आमंत्रण भेजें.

समय से पहले ही आप अपने निमंत्रण भेजदें, इसी में भलाई है. चूंकि ज्यादातर लोगों के लिए अवकाश एक व्यस्त समय है, इसलिए आप अपने क्रिसमस पार्टी निमंत्रण को जल्द से जल्द भेजना चाहेंगे, क्योंकि आपके पास एक तारीख और स्थल की योजना है.









अपने मेनू की योजना बनाएं और बजट सेट. अगर आप सब कुछ इंतेज़ाम करने से सक्षम हैं तो आगे बढ़ें और अपने मेनू की योजना बनाएं.





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25 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है क्रिसमस

 25 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है क्रिसमस




क्रिसमस करीब चौथी सदी से मनाना शुरू हुआ. उससे पहले यीशु के अनुयायी उनके जन्मदिवस को त्योहार के रूप में नहीं मनाते थे. भारत समेत पूरी दुनिया भर में क्रिसमस धूमधाम से मनाया जाता है. जानिए 25 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है क्रिसमस 











मान्यताओं के मुताबिक, 25 दिसम्बर के दिन रोम के गैर ईसाई समुदाय के लोग सूर्य का जन्मदिन मनाते थे. उनका मानना था कि दिसम्बर 25 से सूरज लौटना (ठंड कम होना) शुरू होता है.    







 क्रिसमस को बड़ा दिन भी कहा जाता है. कहा जाता है कि ईसाई चाहते थे की यीशु का जन्मदिन भी इसी दिन मनाया जाए. माना जाता है कि इस त्योहार की रस्मों को ईसाई धर्म गुरुओं ने अपने धर्म से मिलाया और इसे क्रिसमस-डे नाम दिया. 











कौन था 'सांता'

ये तो सभी जानते है कि क्रिस्मस पर सांता गिफ़्ट देता है. खासकर बच्चों को सांता का इंतज़ार रहता है. आइए जानते हैं कौन था वो शख़्स जिससे प्रेरित होकर सांता क्लॉज़ बना. 





तीसरी सदी में जीसस की मौत के 280 साल बाद मायरा में संत निकोलस के जन्म हुआ. बचपन में माता पिता के गुज़र जाने के बाद निकोल को जीसस पर यकीन था. 











बड़े होकर वे पादरी बने. उन्हें लोगों की मदद करना अच्छा लगता था. 








निकोलस आधी रात को गिफ्ट दिया करते थे, इसलिए उन्हें संता कहा जाता था.











 संत निकोलस की वजह से ही लोग क्रिसमस के दिन संता का इंतजार करते हैं. 







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क्रिसमस ट्री पर स्नोफॉल तो कर सकते हैं

 क्रिसमस ट्री पर स्नोफॉल तो कर सकते हैं


क्रिसमस के त्यौहार पर क्रिसमस ट्री का खास महत्व है. यह अमूमन डगलस, बालसम या फर का पौधा होता है जिसे क्रिसमस के लिए सजाया जाता है.









मान्यता है कि इसे सजाने से घर के भीतर सकारात्मक ऊर्जा आती है. अगर आप भी क्रिसमस ट्री सजाने की सोच रहे हों तो इसे सजाएं कुछ इस अंदाज में ताकि हर कोई देखता रह जाए.






जैसे कई तरह के रंगों में घंटियां और

रेड-गोल्डन बॉल्स. इन्हें लगाने से ट्री का आकर्षण भी बढ़ता है और इनका पारंपरिक महत्व है.











रंगीन लाइट्स से क्रिसमस ट्री सजाई जा सकती है. इन्हें लगाते वक्त प्रपोर्शन का ध्यान रखें. ट्री छोटी और लाइट्स बहुत बड़े आकार की या बहुत सी न हों. एक ही तरह की लाइट्स की बजाए कई रंगों का इस्तेमाल कर सकते हैं. लाइट्स मद्धिम रौशनी वाली हों तो और भी अच्छा.





सर्दियों का मौसम है तो क्रिसमस ट्री के साथ स्नोफॉल का दृश्य तैयार किया जा सकता है. यूरोपियन देशों की तर्ज पर क्रिसमस ट्री में रुई के फाहे लगा दें ताकि ऐसा लगे मानो बर्फ गिर रही हो. ये देखने में बहुत  सुंदर लगता है.










ट्री के आसपास अपने परिवार के सदस्यों और मिलने-जुलने आने वालों के लिए तोहफे रखे जा सकते हैं.





साथ ही ट्री को सांताक्लॉज की टोपी पहनाएं क्योंकि आखिरकार यही तो है जो सबकी इच्छाएं पूरी करने जा रहा है 










 ट्रैडिशनल लुक के लिए गोल्डन पेपर और गिल्टर्स भी आसपास छिड़क दें.






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Sunday, November 5, 2017

भूत सचमुच में होते हैं, और वो ऐसे होते हैं!

भूत सचमुच में होते हैं, और वो ऐसे होते हैं!



विज्ञान भूतों को नहीं मानता लेकिन आत्मा जैसी कोई न कोई शक्तिशाली चीज है जो इंसान में रहती है इस बात को लेकर कई रिसर्च किए जा रहे हैं। लेकिन भूत होते हैं? वो कैसे होते हैं? कहां रहते हैं ? कोई नहीं जानता।









वैसे, हिंदू धर्म में गति और कर्म के अनुसार मरने वाले लोगों का वर्गीकृत किया गया है। यानी जो तय मृत्यु से पहले किसी दुर्घटना में या आत्महत्या करते हैं वो भूत बनते हैं। उन्हें अपनी आयु पूरी करनी होती है तभी वह अपने कर्मों के अनुसार स्वर्ग और नर्क में पहुंचते हैं।








वैसे वैदिक ग्रन्थ गरुड़ पुराण में भूत-प्रेतों के विषय में विस्तृत वर्णन उपलब्ध है। ग्रंथ के अनुसार आत्मा के तीन स्वरुप माने गए हैं जीवात्मा, प्रेतात्मा और सूक्ष्मात्मा। जो भौतिक शरीर में वास करती है उसे जीवात्मा कहते हैं। जब इस जीवात्मा का वास और कामनामय शरीर में निवास होता है तब उसे प्रेतात्मा कहते हैं। यह आत्मा जब सूक्ष्मतम शरीर में प्रवेश करता है, उस उसे सूक्ष्मात्मा कहते हैं।









18 तरह के होते हैं भूत


हिन्दू धर्म में गति और कर्म अनुसार मरने वाले लोगों का विभाजन किया है भूत, प्रेत, पिशाच, कूष्मांडा, ब्रह्मराक्षस, वेताल और क्षेत्रपाल। उक्त सभी के उप भाग भी होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार 18 प्रकार के प्रेत होते हैं। भूत सबसे शुरुआती पद है या कहें कि जब कोई आम व्यक्ति मरता है तो सर्वप्रथम भूत ही बनता है।






इसी तरह मनुष्य जन्म 84 लाख योनियां पशुयोनि, पक्षी योनि, मनुष्य योनि में जीवन यापन करने के बाद मिलता है। आत्माएं मरने के बाद अदृश्य भूत-प्रेतयोनि में चले जाते हैं। आत्मा के प्रत्येक जन्म द्वारा प्राप्त जीव रूप को योनि कहते हैं। ऐसी 84 लाख योनियां है, जिसमें कीट-पतंगे, पशु-पक्षी, वृक्ष और मानव आदि सभी शामिल हैं।









कौन बनता है भूत


ऐसे व्यक्ति जो भूख, प्यास, काम से विरक्त होकर राग, क्रोध, द्वेष, लोभ, वासना आदि इच्छाएं और भावनाएं लेकर मरता है अवश्य ही वह भूत बनकर भटकता है। और जो व्यक्ति दुर्घटना, हत्या, आत्महत्या आदि से मरा है वह भी भू‍त बनकर भटकता है। ऐसे व्यक्तियों की आत्मा को तृप्त करने के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। जो लोग अपने स्वजनों और पितरों का श्राद्ध और तर्पण नहीं करते वे उन अतृप्त आत्माओं द्वारा परेशान होते हैं।






यम नाम की वायु वेद अनुसार मृत्युकाल में 'यम' नामक वायु में कुछ काल तक आत्मा स्थिर रहने के बाद पुन: गर्भधारण करती है। जब आत्मा गर्भ में प्रवेश करती है तब वह गहरी सुषुप्ति अवस्था में होती है। जन्म से पूर्व भी वह इसी अवस्था में ही रहती है।











जो आत्मा ज्यादा स्मृतिवान या ध्यानी है उसे ही अपने मरने का ज्ञान होता है और वही भूत बनती है। जिस तरह सुषुप्ति से स्वप्न और स्वप्न से आत्मा जाग्रति में जाती हैं 





उसी तरह मृत्युकाल में वह जाग्रति से स्वप्न और स्वप्न से सु‍षुप्ति में चली जाती हैं 








फिर सुषुप्ति से गहन सुषुप्ति में। यह चक्र चलता रहता है।



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Saturday, October 14, 2017

घर में लगाएं ये पौधे, खूब बरसेगा धन

घर में लगाएं ये पौधे, खूब बरसेगा धन


मां लक्ष्मी को कमल प्रिय है। इसके अलावा कई ऐसे भी पौधे प्रिय हैं जिन्हें लगाने से घर में बरकत आने लगती है।













कमल: कमल का फूल प्रतीक होता शुद्धता, नैतिक ताकत। इसे घर के एंट्रेंस में लगाना चाहिए। यह घर में सकारात्मक वातावरण लाता है। ऐसा भी कहा जाता है कि यह घर में ज्ञान या आत्मज्ञान का वातावरण फैलाता है।










मनी प्लांट: मनी प्लांट प्रतीक है आर्थिक सुख समृद्धि का। इसे घर में लगाने से घर की मुखिया के आय में वृद्धि होती है। इसे लगाने की सबसे अच्छी जगह है











ऑफिस। अगर आप इसे घर में लगाने की सोच रहे हैं तो आप इसे घर के लिविंग रुम में लगा सकते हैं।









लिली का पौधा: लिली का पौधा घर में लगाना का काफी अच्छा होता है। यह पौधा घर के लोगों में खुशियां, सौहार्द बढ़ाता है। लिलि के पौधे की खासियत है










कि इस लगाने से घर के लोग पहले की तुलना में काफी शांत हो जाते हैं। इसलिए इस पौधे को अपने घर के लिविंग रुम या फिर मेडिटेशन वाले कमरे में लगाना चाहिए।










चाइनीस फ्लावर: चाइनीस फ्लावर नई आशा और नई शुरुआत का प्रतीक है। इसके पौधे को घर पर लगाने से घर में खुशियां आती हैं। यही नहीं जिन पति-पत्नी में घर में लड़ाई होती है











उन्हें खासतौर पर अपने घर में चाइनीस फ्लावर लगाने चाहिए। इस पौधे को आप घर के लिविंग रुम या फिर डाइनिंग रुम में लगाना चाहिए।










जेड प्लांट: जेड प्लांट एक मीडियम साइज का कैकटस प्लांट है। इसके बारे में कहा जाता है कि इसे ऑफिस में लगाने से पैसा आता है और आपकी सुख-समृद्धि मे वृद्धि होती है।







दरवाजे के पास इसे एंट्रेंस में लगाना चाहिए। इसे लगाते समय इस बात का ध्यान रखें कि यह प्लांट 1 मीटर से ज्यादा नहीं बढ़ना चाहिए। इस बात का भी ध्यान रखें कि इसमें ज्यादा पानी न डालें। 



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